भव्य शोभायात्रा निकली,श्री धर्मनाथ जिनालय व दादाबाड़ी प्रतिष्ठा हेतु पंचाह्निका महोत्सव प्रारम्भ

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** जिनको परमात्मा का शासन मिल गया वो कभी किसी के अधीन नहीं हो सकता
रायपुर। धर्मनाथ जिनालय एवं दादाबाड़ी में प्रतिष्ठित होने वाली प्रतिमाओं व जल विधान किए हुए जल का कलश लेकर शुक्रवार की सुबह एक भव्य शोभायात्रा चतुर्विध संघ के साथ विवेकानंद नगर जिनालय से निकलकर दादाबाड़ी पहुंची, लगभग 5000 लोग इस शोभा यात्रा में शामिल थे। शोभायात्रा के मार्ग पर श्रद्धालुओं ने पुष्प वर्षा कर स्वागत किया। सुबह वेदिका पूजन के पश्चात दोपहर परमात्मा का पोंखणा के जिन मंदिर में प्रवेश व पंचकल्याणक पूजा हुआ।
इस संदर्भ में गच्छाधिपति आचार्य श्री जी ने अपने हितोपदेश में बताया कि परमात्मा को बधाते हुए शोभा यात्रा के रूप में लाने से हमें हर भव में उनका शासन मिलता है और जिनको परमात्मा का शासन मिल गया वो कभी किसी का अधीन नहीं हो सकता,और गुरु मार्ग पर चलते हुए शिष्य भी गुरु से आगे निकल जाता है, एकलव्य ने गुरु द्रोण की मूर्ति के सामने साधना कर धनुर्विद्या सिख ली।
दादाबाड़ी प्रतिष्ठा महोत्सव के संदर्भ में मीडिया से चर्चा करते हुए खरतरगच्छाधिपति अवन्तितीर्थोद्धारक आचार्य प्रवर श्री जिन मणि प्रभ सूरीश्वर जी मा सा, मुनि विरक्त सागर जी मा सा ने महोत्सव के संदर्भ में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रतिमाओं में प्राण डालने की जो विधि संवत पूजन हो रहा है उसे ही प्रतिष्ठा समारोह कहते हैं। इसी कड़ी में शनिवार को दस दिशाओं के इष्ट देवताओं का पूजन कर उनको इस महोत्सव में आने का आह्वान किया जावेगा और भैरव पूजन कर इस महा विधान का हर कार्य मंगलकारी पूर्ण होने की प्रार्थना की जायेगी। मंदिर संबंधित हर कार्य में सभी देवी देवताओ और सभी गण के देवी देवताओं को पहले आने का निमंत्रण दिया जाता है क्योकि हम संसारी है और देवी देवताओं की कृपा हमारे ऊपर हमेशा बनी रहती है इसलिए सबसे पहले उन्हें आने का निवेदन करके निमंत्रण दिया जाता है।
उन्होंने बताया कि दादाबाड़ी तो देश में और भी कई जगहों पर है पर रायपुर का यह ऐतहासिक नव निर्मित दादाबाड़ी अपने आप में अद्भूत और दर्शनीय है। हालांकि कोरोनाकाल के चलते इसके निर्माण में लगभग तीन साल लग गए लेकिन सकल जैन समाज और श्री ऋषभदेव मंदिर ट्रस्ट के निष्ठावान धर्मप्रेमी टीम की कड़ी मेहनत से यह संभव हो पाया है। जैन धर्म ने कभी भी जातिवाद को नहीं स्वीकारा है, वह हर धर्म को स्वीकार करता है,पर जैन धर्म के जो सात्विक विचारधारा व मार्ग है उन पर संयम के साथ चलने व सभी के प्रति प्रेमभाव बनाये रखने का सभी से आव्हान करते हैं। इस अवसर पर विजय कांकरिया, अशोक कांकरिया, महेंद्र कोचर, दीपचंद कोटडिया, श्रेयांश जैन, भारत जैन व पंकज कांकरिया उपस्थित थे।
शनिवार के कार्यक्रम
श्री धर्मनाथ जिनालय एवं जिनकुशल सूरी दादाबाड़ी के 10 दिन चलने वाले इस महामहोत्सव में शनिवार को जिनकुशल सूरी दादाबाड़ी में कुम्भ स्थापना होगी किसी भी मंगल कार्य के पहले कुम्भ स्थापना और अखंड दीपक स्थापना और ज्वारा रोपण होता है ,यह विधान प्रात: 5.30 बजे से शुरू होगा।
सुबह 9.30 बजे से साइंस कालेज मैदान में रत्नपुरी नगरी का उद्घाटन पश्चात गच्छाधिपतिश्री का उद्बोधन होगा। भामा शाह मोती लाल जी झाबक परिवार द्वारा होगा और दोनों भोजन खंड भारत चक्रवर्ती एवं गुरु गौतम स्वामी भोजन खंड का उद्घाटन दुलीचंद जी जीवन देवी तातेड़ परिवार द्वारा किया जायेगा। कल्याणक से कल्याण की ओर कल्याण महिमा व भक्ति का राजसभा में मंचन किया जायेगा। इसके लिए गुजरात व महाराष्ट्र के कोरियोग्राफर पिछले दो माह से व्यापक तैयारी कर रहे थे आज उनकी कला का जीवंत प्रदर्शन देखने का समय आ गया।

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