सारंगढ़ नगर पालिका अध्यक्ष को हटाने का आदेश रद्द, हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच का बड़ा फैसला

Estimated read time 1 min read

बिलासपुर। हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने सारंगढ़ नगर पालिका के अध्यक्ष को पद से हटाने के आदेश को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने मामले में टिप्पणी करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ नगर पालिका अधिनियम, 1961 की धारा 41-ए के तहत चुने हुए नगर पालिका अध्यक्ष को हटाना और अयोग्य ठहराना सही नहीं है, अगर यह कार्रवाई प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का सख्ती से पालन किए बिना की गई है। मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा एवं जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डीबी में हुई। याचिकाकर्ता सोनी अजय बंजारे स्थानीय निकाय में नगर पालिका परिषद सारंगढ़ के पार्षद के रूप में चुनी गई थीं। लोकल बॉडी इलेक्शन में काउंसिल, सारंगढ़ की प्रेसिडेंट के तौर पर चुनाव जीता और उसके बाद 3 जनवरी 2022 से नगर पालिका परिषद सारंगढ़ की अध्यक्ष चुनी गईं। उनके कार्यकाल में नगर पालिक परिषद सारंगढ़ की सीमा के अंदर अलग-अलग जगहों पर मौजूद परिषद की ज़मीन के कुछ हिस्से दुकानों के कंस्ट्रक्शन या एक्सटेंशन के लिए प्राइवेट लोगों को लीज़ पर दिए गए थे। अलॉटमेंट मौजूदा दुकानों से सटे ज़मीन के छोटे टुकड़ों से जुड़े थे और इन्हें प्रेसिडेंट-इन-काउंसिल के प्रस्तावों के ज़रिए मंज़ूरी दी गई थी और बाद में म्युनिसिपल काउंसिल की जनरल बॉडी के सामने रखा गया था। इस अलॉटमेंट के मामले में म्युनिसिपल ज़मीन का कब्ज़ा राज्य सरकार की मंज़ूरी मिलने से पहले और छत्तीसगढ़ म्युनिसिपैलिटीज़ (ट्रांसफ़र ऑफ़ इम्मूवेबल प्रॉपर्टी) रूल्स, 1996 के तहत तय कानूनी प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही लाभार्थी को सौंप दिया गया था। मामले की शिकायत पर अध्यक्ष सोनी अजय बंजारे को कारण बताओ नोटिस जारी कर जांच की गई। जांच के उपरांत 2 जुलाई 2025 को आदेश जारी कर जमीन के अलॉटमेंट में जरूरी कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बिना और सक्षम अथॉरिटी की पहले से मंज़ूरी के बिना किया गया था। राज्य सरकार की राय थी कि अपील करने वाले का प्रेसिडेंट के तौर पर बने रहना पब्लिक इंटरेस्ट में सही नहीं है, इसलिए उसने एक्ट, 1961 के सेक्शन 41-ए के तहत अपनी शक्तियों का इस्तेमाल किया और उसे अगले टर्म के लिए अयोग्य ठहराने के साथ-साथ अध्यक्ष पद से हटाने का आदेश दिया। इस आदेश के खिलाफ उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। हाईकोर्ट की एकलपीठ ने शासन के आदेश को सही ठहराते हुए याचिका खारिज की। इसके खिलाफ उन्होंने डीबी में अपील पेश की थी।

You May Also Like

More From Author

+ There are no comments

Add yours